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पहली बार शाहरुख खान के नाना ने आजाद भारत में लाल किले पर तिरंगा लहराया, जानिए कौन थे जनरल शाहनवाज़ खान?

देश को आजादी दिलाने के लिए कई लोगों ने अथक प्रयास किये,यहां तक कि अपनी जान भी गवाही पर देश को आजाद दिलाने के लिए हर किसी ने भरपूर प्रयास किया और उनके प्रयासों का ही नतीजा है आज हम खुली हवा में सांस ले सकते हैं और खुलकर जी सकते हैं, पर अगर आज उन इन स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार घर से कोई इसका वास्ता देता है यह बताता है कि हम उस स्वतंत्रता सेनानी के वंश है तो लोग उसे हंसी में उड़ाते हैं और कहते हैं आजादी दिला कर कौन सा बड़ा काम किया है,

पर हकीकत बात यह है कि आज के समय में जगह जगह भ्र,ष्टा,चार फैला है और ऐसे लोग उसको दूर करने की बात तो दूर अपने आसपास हो रहे गलत को भी रोक नहीं रोक पाते हैं, ऐसे लोग समाज के लिए एक मुद्दा ही है जो अपने प्रयासों को सही दिशा में इस्तेमाल नहीं करते आज हम स्वतंत्रता सेनानी के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका आपने अक्सर नाम सुना होगा.इनका आदर सम्मान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर साल लाल किले पर 15 अगस्त का झंडा जब फहराया जाता है तब हमारे प्रधानमंत्री इन तीनों का नाम बहुत आदर से लेते हैं,

क्योंकि इन्होंने आजादी में विशेष योगदान दिया, इन स्वतंत्रता सेनानियों में जो 1 नाम बहुत आदर से लिया जाता है वह है शाहनवाज खान. शाहनवाज़ खान ने आजाद भारत फौज के मेजर, सैनिक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के काफी करीबियों में से एक व्यक्ति रह चुके थे। जनरल शाहनवाज खान ने ही हिंदुस्तान की आजादी के बाद ब्रिटिश के झंडे को उतारकर हमारे तिरंगे को लाल किले पर शान से फहराया था।

शाहनवाज का जन्म 24 जनवरी 1914 को हुआ था और इनके तीन बेटे और तीन बेटियां हैं। जिसमें इन्होंने लतीफ फातिमा को गोद लिया था। बता दे लतीफा फातिमा के बेटे मशहूर अभिनेता शाहरुख खान हैं। शाहनवाज खान के पोते आदिल शाहनवाज उनके नाम से एक फाउंडेशन चलाया करते है। शाहनवाज खान का आजादी में योगदान इस बात से भी पता चलता है कर्नल प्रेमचंद, कर्नल गुरुबख्शक और जनरल शाहनवाज खान जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर डाक विभाग ने डाक टिकट जारी किया है।

आपको बता दे शाहनवाज खान ने मेरठ से कांग्रेस पार्टी की तरफ से 1952, 1957, 1962 और 1971 में लोकसभा चुनाव जीतने के साथ केंद्र सरकार में 23 सालों तक मंत्री बने रहे। वह 1952 में डिप्टी रेलवे मिनिस्टर और पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी के साथ 1957 से 1964 तक कृषि मंत्री भी बने। उन्होंने लगभग 1966 में पुनर्वास मंत्रालय की जिम्मेदारी उठाई। पेट्रोलियम, रसायन और कृषि सिंचाई मंत्रालय की जिम्मेदारी 1971-1975 तक और 1977 तक केंद्रीय कृषि मंत्री के चेयरमैन का उन्होंने उत्तरदायित्व भी अच्छी तरह संभाला था । बता दे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु का कारण जानने के लिए 1956 में बनाए गए कमीशन के अध्यक्ष भी जनरल शाहनवाज ही थे।

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